नीतीश कुमार को भाजपा क्यों याद आई?

नीतीश कुमार को भाजपा का साथ छोड़े एक साल से अधिक बीत गया है। इस दौरान उनके प्रयासों से भाजपा विरोधी दलों का गठबंधन इंडिया भी बन गया है। इसलिए यह सवाल स्वभाविक है कि शनिवार को नीतीश कुमार मुस्लिम नेताओं से मुलाकात के दौरान बार बार भाजपा को क्यों याद कर रहे थे?

 

जागृत टीम

पटना: शनिवार को बिहार की राजधानी पटना में स्थित मुख्यमंत्री आवास एक अन्ने मार्ग के अंदर और बाहर बड़ी गहमा गहमी थी। मौका था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुस्लिम नेताओं की मुलाकात का। इस मुलाकात का आयोजन जदयू एमएलसी डॉ. खालिद अनवर ने किया था। मुख्यमंत्री के साथ मुस्लिम नेताओं की इस मुलाकात को “कारवान-ए इत्तेहाद व भाईचारा” के समापन समारोह का अलिखित नाम दिया गया।

डॉ. खालिद अनवर ने मीडिया को बताया कि इस बैठक में मुस्लिम समुदाय के वे नेता खास तौर से आमंत्रित थे, जिन्होंने कारवां को सफल बनाने में किसी भी तरह का सहयोग दिया था। मीटिंग में शामिल कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया। लेकिन कई एक ऐसे भी मिले, जिन्होंने “बात रखने वालों” के दावों को खारिज कर दिया। ऐसे लोगों ने बताया कि मीटिंग में उन्हें ही बोलने का अवसर मिला, जो बाहर भी गुणगान करते रहते हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के सामने मुस्लिम नेताओं ने सरकार के कामों की खूब तारीफ की। समस्या के तौर पर वही उर्दू और मदरसे का पुराना राग अलापा गया। किसी ने मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछा। उनसे नहीं पूछा कि बिहारशरीफ में मदरसा अज़ीज़िया और अनमोल किताबों से भरी उसकी लाइब्रेरी क्यों जलाई गई?

मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मां खान ने कहा कि ‘हमारे नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी धर्मों और समुदायों के विकास के लिए काम करते हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों के लिए भी बहुत से काम किए हैं। उसके बावजूद वे पूछते रहते हैं कि यदि कहीं कोई समस्या है तो लोग बताएं ताकि उसका हल निकाला जा सके।’ संयोग से मंत्री ज़मां खान को पूरी भीड़ में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो बताता कि अशोक राजपथ पर स्थित उर्दू अकादमी वर्षों से निष्क्रिय है। फारसी शोध संस्थान ज़िंदा है भी कि नहीं, कम लोगों को पता है। मदरसा इस्लामिया शम्सुलहुदा ऐतिहासिक होने के साथ ही इतिहास बनने जा रहा है। अंजुमन उर्दू तरक्की, बिहार को सरकार से हर साल पैसे तो मिलते हैं, लेकिन उसके कामों का हिसाब लेना मना है।

लेकिन ये सब तो ऐसी बातें हैं जो सामने की हैं और करीब करीब रोज पढ़ने सुनने को मिलती हैं। मीटिंग की सबसे दिलचस्प और बिहार ही नहीं देश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाली बात यह है कि मुस्लिम नेताओं को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार बार भाजपा को याद करते हुए दिखाई दिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने भी बताया कि भाजपा के साथ रहते हुए भी उन्होंने अपनी पार्टी के सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। सवाल ये है कि भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने में लगे नीतीश कुमार के इस ताजा भाजपा प्रेम का क्या नाम दिया जाए!!!!

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