नीतीश कुमार के नए पुराने दोनों साथी सख्त

नीतीश कुमार राजद नीत महागठबंधन छोड़ कर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में शामिल हो गए हैं। माना जा रहा है कि इससे लोक सभा में जदयू और भाजपा दोनों को फायदा होगा। लेकिन इसके लिए नीतीश कुमार को क्या क्या झेलना पड़ेगा?

बिहार और खास तौर से नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य के बारे में उठ रहे इस सवाल का जवाब उनके नए पुराने दोनों साथियों ने दे दिया है। जी हां, राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय जनता पार्टी ने अपनी अपनी मंशा जाहिर कर दी है। दोनों दलों नेए क तरह से खुल कर बता दिया है कि वे नीतीश कुमार के साथ कैसा बर्ताव करने वाले हैं। खास बात ये है कि राजद और भाजपा ने एक ही तरह की बात कही है।

नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री का शपथ लेने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि जदयू ने सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा था। जदयू की मांग पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने समर्थन करने का फैसला किया। उन्होंने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि राजद द्वारा जदयू को तोड़ने की कोशिश की जा रही थी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दूसरे कारणों के साथ इसको भी बताया है।

दिलचस्प बात ये है कि 9 अगस्त 2022 को भाजपा का साथ छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार ने यही तर्क दिया था। उस समय अपनी ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सी पी सिंह पर भाजपा के साथ मिलकर जदयू को कमजोर करने का आरोप लगाया था। राजद के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने भी यही बात कही है। उन्होंने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक दिन बाद यानि बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगस्त 2022 में नीतीश जी ने अपनी पार्टी को बचाने के लिए लालू यादव से समर्थन मांगा था। उस समय वे ये कह कर मदद मांगने आए थे कि भाजपा उनके दल को तोड़ने की साजिश कर रही है।

राजद और भाजपा की इन बातों से साफ हो गया है कि दोनों सहयोगी बदलने या पलटी मारने के आरोपों से बचना चाहते हैं और इसका सेहरा नीतीश कुमार के सर बांधने ही में बेहतरी समझते हैं। इसका दूसरा पहलू ये है कि दोनों नीतीश कुमार को अपने एहसानों तले दबाए रखना चाहते हैं। इस दबाव को नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव के बाद कितने दोनों तक बर्दाश्त कर पाएंगे, अपनी राय कमेंट कर के दें। स्टोरी अच्छी लगे तो शेयर करें।

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