सरकार मर गई या गुलनाज़ ?

पटना। बिहार ही नहीं देश भर में यह महत्वपूर्ण सवाल पूछा जा रहा है कि सरकार मर गई या गुलनाज़ । दरअसल जिस समय बिहार की राजधानी पटना में नई सरकार गठन करने की तैयारियां अपने अंतिम चरण में थीं, उसी समय लोकतंत्र की जननी वैशाली में गुलनाज़ खातून को दफनाया जा रहा था। गुलनाज़ की मौत रविवार, 15 नवंबर को रात के करीब 12: 30 बजे पीएमसीएच में हुई थी। की दिनों से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही गुलनाज़ खातून ने अंतिम सांस उस समय लिया जब पक्ष और विपक्ष के सभी नेता सरकार बनाने की कवायद में जीत और हार कर गहरी नींद सो रहे थे।

कौन थी गुलनाज़ ?

गुलनाज़ खातून वैशाली जिले के चांदपुरा थानांतर्गत देसरी ओपी स्थित रसूलपुर हबीब गांव की रहने वाली थी। करीब बीस साल की गुलनाज़ खातून के पिता का तीन साल पहले निधन हो गया। वह अपनी मां और भाई बहन के साथ रहती थी। गांव ही का सतीश कुमार वल्द विनय कुमार राय उसके साथ कई महीनों से छेड़खानी करता था। उसकी शिकायत गुलनाज़ की मां ने सतीश के घर वालों से भी की थी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। सतीश को जब अपने घर वालों से डांट फटकार नहीं लगी तो उसका मन और बढ़ता गया। उसने गुलनाज़ पर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। लड़की ने उससे इंकार किया तो सतीश ने उसे जान से मारने की धमकी दी। ये बातें गुलनाज़ ने इलाज के दौरान अपने बयान में कही है।

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तेल छिड़क कर आग लगा दी

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में गुलनाज़ यह कहते हुए साफ़ सुनाई दे रही है कि सतीश कुमार और चंदन कुमार ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। पीड़िता की मां और बहन के अनुसार गुलनाज़ 30 अक्टूबर को शाम करीब पांच बजे कूड़ा फेंकने घर से निकली। बाहर में सतीश और चंदन पहले ही से मौजूद थे। दोनों ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। आग में अपनी बहन को जलता देख गुलनाज़ की छोटी बहन ने शोर मचाया। जब तक घर और गांव वाले आग बुझाते पीड़िता 70 फीसद से अधिक जल चुकी थी। उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन हालत बिगड़ती देख लड़की को पटना स्थित पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। यहां कई दिनों तक मौत से लड़ने के बाद गुलनाज़ खातून ने 15 नवंबर को रात में करीब साढ़े बारह बजे दम तोड़ दिया।

विरोध प्रदर्शन

पीड़िता की मौत की खबर से आहत पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों और कुछ समाजसेवी संगठनों ने रविवार को उस समय राजधानी के कारगिल चौक पर लाश के साथ विरोध प्रदर्शन किया जब एनडीए अपने विधायक दल का नेता चुनने और महागठबंधन किसी तरह बहुमत जुटाने की फिराक में था। इस प्रदर्शन का भाकपा माले को छोड़ कर बाकी किसी भी दल पर कोई असर नहीं पड़ा। सोमवार को भी छात्रों और समाजसेवी संगठनों ने गुलनाज़ को इंसाफ दिलाने के लिए पटना में कैंडल मार्च निकाला। इसका थोड़ा सा असर स्थानीय प्रशासन पर पड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार वैशाली पुलिस प्रमुख ने पीड़िता के घर वालों को आश्वासन दिया है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा नहीं तो उनके घरों की कुर्की जब्ती होगी।

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One thought on “सरकार मर गई या गुलनाज़ ?

  • November 17, 2020 at 5:48 am
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    Highly pathetic news. Hope goverment will deliver justice to victim family.

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