नीतीश के मेवालाल

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके मेवालाल शायद रास नहीं आ रहे हैं। मेवालाल एनडीए की नई सरकार में शिक्षा मंत्री हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से हैं और तारापुर विधान सभा क्षेत्र से जीत कर आए हैं। वे सबसे अमीर मंत्री भी हैं। पढ़ाई के हिसाब से भी मंत्रीमंडल में सबसे अधिक पढ़े लिखे माने जाते हैं। वैज्ञानिक हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति यानी वाइसचांसलर रह चुके हैं। उन्होंने वाइसचांसलर रहते जो कारनामे किए थे वही उनके लिए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए गले की हड्डी बन गए हैं। मेवालाल चौधरी, जी हां, बिहार के नए शिक्षा मंत्री का यही नाम है। वो क्यों बन रहे हैं नीतीश कुमार के गले की फांस ?

भ्रष्टाचार का आरोप

इस बार नीतीश कुमार चुनावी नतीजे आने के बाद ही से कमजोर लग रहे हैं। यह भी हो सकता है कि भाग्य थोड़ा इधर उधर हो गया हो। शायद इसी लिए नीतीश कुमार अपने ही तैयार किए गए जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल नीतीश कुमार ने 26 जुलाई 2017 को भ्रष्टाचार ही को आधार बनाकर महागठबंधन से अलग हुए थे। उस समय सीबीआई और ईडी आदि ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जदयू और खुद नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से जनता के बीच आ कर सफाई देने या फिर आरोप मुक्त होने तक सरकार से बाहर हो जाने के लिए कहा था। तेजस्वी या फिर यूं कहें कि लालू प्रसाद ने तब नीतीश कुमार की बात नहीं मानी। नतीजा यह हुआ कि तेजस्वी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। नीतीश कुमार ने तेजस्वी को मंत्रीमंडल से हटाने की बजाय खुद ही इस्तीफा दे दिया। नतीजे के तौर पर सरकार खत्म हो गई और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री से पूर्व उपप्रधानमंत्री बन गए।

सुशील मोदी की भूमिका

नीतीश सरकार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भाजपा नेता और तत्कालीन पूर्व उपप्रधानमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मोर्चा खोल रखा था। वे करीब करीब हर रोज़ मीडिया के सामने नए नए आरोप लगाते। इसके जरिए सुशील कुमार मोदी जनता को यह पैगाम देने की कोशिश की थी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

फिर वही सुशील कुमार मोदी

इस बार तेजस्वी यादव की बजाय नीतीश सरकार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी निशाने पर हैं। मेवालाल पर कोई नया आरोप नहीं लगा है। उन पर वही आरोप हैं जो वर्षों पहले लगाए गए थे। खुद सुशील कुमार मोदी ने मेवालाल चौधरी की गिरफ्तारी की मांग की थी।

इंटरनेट ने बढ़ाई परेशानी

इंटरनेट और मोबाइल की सहूलियत ने नेताओं की परेशानी बढ़ा दी है। यदि इंटरनेट और मोबाइल नहीं होता तो शायद मेवालाल चौधरी की पुरानी कहानी आमजन तक इतनी जल्दी नहीं पहुंच पाती। अभी हाल ये है कि मेवालाल चौधरी पर लगे आरोपों की पूरी लिस्ट एक क्लिक में सामने आ जाती है। इतना ही नहीं सुशील कुमार मोदी का वह बयान भी सबके सामने है जो उन्होंने बुधवार 22 फरवरी 2017 को देते हुए जदयू विधायक मेवालाल चौधरी की गिरफ्तारी की मांग की थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता का बयान उसी दिन मीडिया में भी छपा था।

दैनिक हिन्दुस्तान की रिपोर्ट

सुशील कुमार मोदी के बयान पर आधारित खबर बनाते हुए दैनिक हिन्दुस्तान ने 22 फरवरी 2017 को लिखा था: “पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोपित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और जदयू विधायक मेवालाल चौधरी को गिरफ्तार करने की मांग की।

बुधवार को जारी बयान में श्री मोदी ने कहा कि राजभवन के निर्देश पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश न्यायमूर्ति महफूज आलम कमेटी की जांच के बाद श्री चौधरी पर सहायक प्राध्यापक सह जूनियर वैज्ञानिकों की बहाली में धांधली का आरोप प्रमाणित हो गया है। आरोपित तत्कालीन कुलपति व वर्तमान विधायक श्री चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री अविलंब आरोपित विधायक को पार्टी से निष्कासित करें।

श्री मोदी ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में धांधली के आरोप के बावजूद पूर्व कुलपति को जदयू का टिकट देकर विधायक बनाया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के 161 सहायक प्राध्यापक सह जूनियर साइंटिस्ट के पदों पर 2012 में हुई बहाली में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप है। दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता व विधान पार्षद विनोद नारायण झा ने भी मेवालाल चौधरी को जदयू से निष्कासित करने की मांग की।”

राजनीति की विडंबना

मेवालाल चौधरी की गिरफ्तारी की मांग करने के करीब पांच महीने बाद समय ने पलटा खाया। नीतीश कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से अलग होने का फैसला करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उसके दूसरे ही दिन उन्होंने भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाई। उस सरकार में नीतीश कुमार जहां मुख्यमंत्री बने वहीं सुशील कुमार मोदी ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके साथ ही मेवालाल चौधरी पर लगे आरोपों के सिद्ध होने की कहानी और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग फिर ठंडे बस्ते में चली गई। मीडिया भी खामोश हो गया। अब सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री नहीं हैं। उनकी जगह तारकिशोर प्रसाद ने ले ली है। शायद इसीलिए मेवालाल चौधरी पर लगे आरोपों की कहानी फिर पर्दे पर आ गई। ये और बात है कि इस बार सुशील मोदी बयान नहीं दे रहे हैं, मेवालाल और भ्रषटाचार के मामले को लालू प्रसाद समेत राजद, कांग्रेस और माले के अन्य नेता उठा रहे हैं।

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