छात्र घर घर जाकर किसान आंदोलन पर क्या बोले ?

छात्रों के एक समूह ने कृषि कानूनों को लेकर मार्च निकाला और लोगों से मुलाकात की, सवाल ये है कि छात्र घर घर जाकर किसान आंदोलन पर क्या बोले?

नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसीएशन (आइसा) ने एतिहासिक किसान आंदोलन के समर्थन में #रविवार 28 फरवरी को नरेला के पान उद्यान, स्वतंत्र नगर और अनाज मंडी के आसपास के इलाक़ों में मार्च निकाला। नरेला की जनता ने किसानों के समर्थन में आइसा के द्वारा दिल्ली भर में अलग अलग जगह रैलीयों के आयोजन में हिस्सा बनने के लिए हस्ताक्षर भी किया।

 

आइसा से जुड़े छात्र नेताओं ने कहा कि पिछले कई महीनों से देश के किसान दिल्ली की अलग अलग सीमाओं पर तीनों कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और कृषि के क्षेत्र में हो रहे निजीकरण और कॉरपोरेट लूट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। लेकिन सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।

जागरूकता अभियान

छात्रों ने सड़कों पर निकल कर किसानों के समर्थन और कृषि कानूनों के विरोध में नारे लगाए तथा पर्चे बांट कर लोगों को इन कृषि क़ानूनों के बारे में जागरूक किया। इन छात्रों ने लोगों को किसानों के संघर्ष के बारे में भी बताया।

26 नवंबर 2020 से जारी है आंदोलन

गौरतलब है कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसान 26 नवंबर 2020 ही से मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान सरकार और किसान संगठनों के बीच करीब दर्जन भर मीटिंग हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार लगातार किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि कृषि कानून अच्छे हैं। दूसरी ओर किसानों का कहना है कि सरकार सबसे पहले तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा अन्य सुविधाओं के बारे में मौखिक आश्वासन के बजाय उन्हें कानून का स्वरूप दे।

किसानों के समर्थन में छात्र

आइसा शुरू ही से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का समर्थन कर रहा है। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन का आइसा शहीद भगत सिंह लाइब्रेरी और मेडिकल कैम्प के ज़रिए साथ दे रहा है।

जम कर लगाए नारे

किसान आंदोलन के लिए लोगों का समर्थन जुटाने के लिए मार्च के दौरान छात्रों ने ‘किसान आंदोलन ज़िंदाबाद!’, ‘तीनों कृषि क़ानून वापस लो!’ , कम्पनी राज नहीं चलेगा!’, ‘किसान और मज़दूर विरोधी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ एक हो!’ और ‘किसानों पर पुलिसिया दमन नहीं चलेगा!’ जैसे नारे जम कर लगाए।

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