कोरोना काल में मोदी सरकार के कदम

जागृत डेस्क

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना की आपदा से निपटने के लिए जो कदम उठाए हैं या नहीं उठाए हैं, उस पर बहस की बहुत गुंजाइश है। लेकिन यह बहस जब केंद्रीय वित्त मंत्री के घर ही में छिड़ जाए तो उसपर आप क्या कहेंगे। इसी तरह की एक बहस हमें फेसबुक पर देखने को मिली। हम यहां उसको जस का तस प्रस्तुत कर रहे हैं।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री #परकला_प्रभाकर ने एक बहुत ही बेलाग और बेबाक लेख लिखा है। उन्होंने कोरोना महामारी में सरकार की निष्ठुरता तथा वंचितों की मदद करने हेडलाइन मैनेजमेंट व अपनी पीठ थपथपाने की प्रवृत्ति की ओर ध्यान खींचते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके मंत्रीमंडलीय सहयोगियों की जमकर खिंचाई की है।

उन्होंने लिखा है – “ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार किसी भी परेशान करने वाले सवाल का जवाब देने से बच रही है। कोरोना को रोकने के लिये पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने जिम्मेदारी भरा और रचनात्मक सुझाव दिया, जिसपर केंद्रीय मंत्री (हर्षवर्धन) ने बेहद असभ्य प्रतिक्रिया दी। पूरे मुद्दे को सियासी जामा पहनाने की कोशिश की।”

परकला प्रभाकर ने प्रधानमंत्री मोदी की खिंचाई करते हुए लिखा है – “ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, पॉलिटिकल पूंजी और वाकचतुरता ने उन्हें उनकी सरकार के गैरजिम्मेदाराना रवैये, अयोग्यता और निष्ठुरता से बचा रखा है।”

पूरा आलेख प्रधानमंत्री श्री मोदी को नसीहत दे रहा है, लेकिन क्या वे इस और ध्यान देकर वास्तव में आम जनता के दुःख-दर्द के प्रति संवेदनशीलता का परिचय देंगे या सिर्फ चुनाव लड़ने और अनैतिक तरीकों से जीतने वाली एक साम्प्रदायिक पार्टी के नेता के अपने स्तर से ऊपर नहीं उठ पाएंगे? अब क्या बीजेपी का आईटी सेल अब परकला प्रभाकर को भी देशद्रोही सिद्ध करने की चेष्टा करेगा? और उनके ट्रोल उन्हें गद्दार, देशद्रोही, पाकिस्तानी इत्यादि विशेषणों से सम्बोधित करने का साहस करेंगे? क्या उन्हें भी अन्य बुद्धिजीवियों की तरह अर्बन नक्सल बताकर उनपर एनएसए लगाया जाएगा?

(श्री प्रवीण मल्होत्रा की टाइमलाइन से कॉपीपेस्ट)

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