मोदी सरकार की आठ साल की उपलब्धी

केंद्र में मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर राष्ट्रीय जनता दल ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के बिहार प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि यह नकारात्मक उपलब्धियों वाली सरकार है।

पटना । मोदी सरकार के आठ साल पुरा होने पर राजद ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजद ने कहा कि आजाद भारत की यह पहली सरकार है जिसके पास आठ साल के शासनकाल में अपनी नकारात्मक उपलब्धियों के अलावा कहने के लिए और कुछ नहीं है ।
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि आठ साल पहले जिन मुद्दों को आधार बनाकर भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई थी, सत्ता में आने के बाद वे सारे मुद्दे या तो जुमला और झांसे बन कर रह गए अथवा उन मुद्दों की उपलब्धि नकारात्मक ही हो गई ।

दो करोड़ नौकरी

चित्तरंजन गगन ने कहा कि वादा किया गया था कि प्रति वर्ष दो करोड़ नौजवानों को नौकरी दी जाएगी। नौकरी तो नहीं मिली करोड़ों लोगों की नौकरी छूट गई या बेरोजगार हो गए। देश में बेरोजगारी का दर पिछले 50 वर्षों में उच्चतम स्रत पर पहुंच गया है। रेलवे में पद घटाए जा रहे हैं । सेना में बहाली बंद है।

एकाउंट में 15 लाख
राजद नेता ने कहा कि मोदी जी ने वादा किया था कि सभी के एकाउंट में 15 – 15 लाख रूपये आ जाएंगे वह तो नहीं ही आया जो पहले से जमा था वह भी चला गया। कहा गया था कि सौ दिनों के अन्दर मुद्रास्फीति कम हो जाएगी और 35 रूपये में डॉलर मिलेंगे । लेकिन आज भारतीय करेंसी का मूल्य निम्नतम स्तर से भी नीचे चला गया।

काला धन

चित्तरंजन गगन ने कहा कि मोदी जी ने काला धन भी वापस लाने का वादा किया था। वह तो वापस नहीं आया पर काला धन वाले आराम से देश छोड़ कर चले गए।

कर्ज का बढ़ता बोझ

राजद ने कहा कि मोदी सरकार में देश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में मात्र 55 हजार करोड़ डॉलर कर्ज लिया गया था और मोदी सरकार अब तक 2 लाख 35 हजार करोड़ डॉलर कर्ज ले चुकी है।
सत्ता में आने के पहले दावा किया था कि सरकार बनने पर किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। सचचाई यह है कि किसानों की आय 35 प्रतिशत कम हो गई।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि पिछले आठ साल में भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों को देखा जाए तो नोटबंदी, जीएसटी , सार्वजनिक क्षेत्र के लाभकारी प्रतिष्ठानों का निजीकरण, कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रख कर किसान विरोधी ‘भूमि अधिग्रहण कानून’ किसान विरोधी कृषि कानून, सीएए, एनआरसी, बगैर किसी तैयारी के देश भर में लगाया गया लॉक डाउन, कोरोना के प्रति लापरवाही, वैक्सीन की उपलब्धता और वैक्सीनेशन में अदूरदर्शिता जैसे कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिससे देश को भारी क्षति उठानी पड़ी है और देश बहुत पीछे चला गया है।
सरकार की उपलब्धि की चर्चा की जाए तो हर क्षेत्र में देश उस स्थिति में पहुंच गया है जहां से उबरना बहुत आसान नहीं होगा। आज पड़ोसी देशों के साथ भी हमारे संबंध सामान्य नहीं रहे। भारत के सबसे भरोसेमंद मित्र रूस की निकटता चीन के साथ बढ़ती जा रही है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता आज संदेह के घेरे में आ गए हैं। लोकतंत्र की गरिमा गिरती जा रही है। अभी ‘सी सर्वे ‘ के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री जी की लोकप्रियता भी बहुत गिर चुकी है और अब उनके प्रशंसकों से कहीं ज्यादा उनके आलोचकों का प्रतिशत बढ़ गया है। इवेंट मैनेजमेंट के सहारे सरकार चल रही है। आठ साल में प्रधानमंत्री जी द्वारा एक भी पत्रकार सम्मेलन को सम्बोधित नहीं किया जाना अपने आप में आश्चर्यजनक है।

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